द्रष्टा का मतलब है देखने वाला, अनुभव करने वाला और जो भी चीज हम अनुभव करते है वह दृश्य है।
दृष्टा को ही हम मै, माय सेल्फ, मी ऐसे कहते हैं। Myself, Me, मै का मतलब है हमारा पूर्व ज्ञान, हमारा भूतकाल, हमारी सारी पूर्व स्मृतिया। यह सब हमारे दिमाग में विचारों के माध्यम से संग्रहित किया जाता है। यानी कि मै जो दृष्टा हूं वह असल में सिर्फ विचार मात्र है।
ज्ञानिंद्रियोंसे हमारा शरीर जो भी अनुभव करता है उसे हम दृश्य कहते है। पूर्व अनुभव हो या वर्तमान के अनुभव हो वह सब हमारे दिमाग कि स्मृतियों में संग्रहित किया जाता है। संग्रहित होने के बाद उस अनुभव कि जो प्रतिक्रिया उठती है उससे हमने अनुभव क्या किया यह समझ में आता है। अनुभव कि जो प्रतिक्रिया होती है वह भी विचार मात्र ही हैl
इसी तरह दृष्टा भी विचार है और दृश्य भी विचार है, दोनों एक है।
जब हमें लगता था कि दृष्टा और दृश्य अलग-अलग है, इस को हम division कहते हैं और जहां division होती है वहां conflict जरूर होता है। यह division हमारे मन में होती है, वहीं division हमारे परिवार और समाज में भी होती है। यही division सभी संबंधों मै दरारें पैदा कर देती है। इसी division से धर्म और nationalisms के नाम पर wars होते रहते है। हमारे relationships में जो हमारे एक दूसरे के बारे में पूर्व अनुभव है वह divisive knowledge हमारे relationships में दरार पैदा कर देती है।
मुक्ति का मतलब है पूर्ण स्वतंत्रता, मुक्ति का मतलब है हमारे स्मृतियां में संग्रह किए हुए पुराने विचारों से छुटकारा, पुराने knowledge से मुक्ति, मुक्ति का मतलब है freedom from all that we know, freedom from the known।
मुक्ति का अर्थ है साक्षी का न होना। स्वतंत्रता का अर्थ है साक्षी की सम्पूर्ण उपेक्षा करना। साक्षी विभाजन का केंद्रबिंदु है। साक्षी मै और दूसरा ऐसे विभाजन को बनाता है। इसी विभाजन हेतु रिश्तों के बीच टकराव पैदा होती है। इसलिए सभी रिश्ते हिंसक हैं। साक्षी का यह विभाजन दुनिया भर में सभी प्रकार के संबंधों में हिंसा और गड़बड़ी पैदा करता है। जब कोई यह सत्य देखता है तो वह विभाजन बनाना बंद कर देता है।
जब हमें इसी तरह मैं का पता लगता है, दृष्टा और दृश्य का पता लगता है तो उससे जो प्रतिभा, जो विवेक जागृत होता है और उससे जो action निकलती है वह सही तरह से नई creation होगी। यह जो नई action और नई activity होगी, हमारा नया बर्ताव होगा वह real meditation है। हजारों सालों से चली आती रही जो परंपरा और उसके साधना मार्ग है वह सब पुराने है, वह सभी हमारे मन को समोहित करके हमें believer बनाते हैं।
Truth is not to believe, not to search but to live with it.
https://youtu.be/xvVL3tT5hZM
