Saturday, April 07, 2018

आत्मसाक्षात्कार का रहस्य



यू.जी. कृष्णमुर्ती नामक (आत्मसाक्षात्कारी) मनुष्य कि विस्फोटक संकल्पनाये जो आपकि धर्म और अध्यात्म कि सारी कल्पनाओंको बदल देंगी या मिटा देंगी।

"लोग मुझे आत्मसाक्षात्कारी 'प्रबुद्ध आदमी' कहते हैं । लेकिन मैं उस शब्द कि घृणा करता हूं। मैं जिस तरह से पेश आ रहा हूँ, उसका वर्णन करने के लिए शायद उन्हें कोई और शब्द नहीं मिल रहा है। मैं सभीको हमेशा यह बताता रहता हूं कि आत्मसाक्षात्कार जैसी कोई चीज हि नहीं है। मै यह दावे के साथ कह सकता हुं, क्योंकि मै सारी ज़िंदगी ऊसे खोजता रहा हुं। मै खुद एक प्रबुद्ध आदमी बनना चाहता था, और मुझे पता चला कि आत्मसाक्षात्कार जैसी कोई चीज नहीं है, और इसलिए कोई विशिष्ट व्यक्ति प्रबुद्ध है या नहीं, यह प्रश्न पैदा नहीं होता है। ईससे पहले आये हुये सभी प्रेषित या आत्मसाक्षात्कार के दावेदार वे सभी शोषणकर्ताओं का एक समूह है, जो लोगों के भोलेपन पर संपन्न हुये है। मनष्य के बाहर कोई शक्ति नहीं है । मनुष्य ने हि परमेश्वर को डर के भय से बनाया है । तो समस्या डर है, भगवान नहीं है ।

मैने खुद अपने लिए पता किया है कि जिसका साक्षात्कार हो एैसा कोई आत्मा नहीं है । और असल मे यही वह आत्मसाक्षात्कार है जिसके बारे में मैं आपसे बात कर रहा हूं। यह एक जबरदस्त झटके के रूप में आता है । वह आप पर एक वज्र कि भांती प्रहार करता है। एैसा समझो कि, आपने आपका सब कुछ आत्म-प्राप्ति कि टोकरी में निवेश किया है, और अंत में, अचानक आपको पता चलता है कि जिसको खोजने के लिए हम निकले थे एैसा कोई आत्मा हि नहीं है और जिसके साक्षात्कार कि आस लगाये बैठे थे एैसा कोई परमात्मा नहीं है । तभी आप आपको पुछने लगेंगे कि मै अबतक यह सब क्या कर रहा था? और यह बात आपके अंदर बहुत बडा विस्फोट करेगी।

मुझे जो आत्मसाक्षात्कार का अनुभव हुआ था वह कोई मानसिक या अध्यात्मिक नहि था, वह संपुर्णतः शारिरीक प्रक्रिया थी। शरीरकि हर मांसपेशीया, स्नायु, हड्डिया आदि सभीमे रासायनीक बदलाव आया था। ईस बदलाव के दौरान असहनीय शारीरिक दर्द मैने सहा था । यही कारण है कि मैं कहता रहता हूं कि आप वास्तव में एैसे साक्षात्कार कि ऊम्मीद नहीं करते हैं। अगर मैं आपको इसकि एक झलक दिखला दुं या इसका एक स्पर्श दे सकता तो आप इसे बिल्कुल भी नहीं छूना चाहेंगे। आप जिस प्रकारके आत्मसाक्षात्कार का पिछा कर रहे है वह कतई अस्तित्वमें नहीं है । वह एक काल्पनीक मिथक है । "

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