Sunday, April 15, 2018

अध्यात्मिक शिक्षा

शिक्षा प्रणाली का अर्थ है एैसी एक पद्धति या एक तकनीक या सोचने का एक तरीका ताकि आपके जीवन में परिवर्तन लाया जा सके। पहलेकि सभी धार्मिक शिक्षाओं ने हमें गुमराह किया है क्योंकि हमारी समस्याओं का अभी तक कोई हल नहीं निकाला है। ईसलिये मेरी तरफ से कभी कोई नई शिक्षा नहीं होगी।

मैं जो कह रहा हूं वह पूरी तरह से शिक्षा के क्षेत्र से बाहर है। जिस तरह से मैं प्राकृतीक ढंग से काम कर रहा हूं उसका यह बस वर्णन मात्र है। मनुष्य की प्राकृतिक अवस्था का यह सिर्फ एक वर्णन है, इसलिए "शिक्षण" इसके लिए सहि शब्द नहीं है।

प्राकृतिक अवस्था यह आत्मसाक्षात्कार वाले या ईश्वर-प्राप्ति वाले मनुष्य की अवस्था नहीं है। क्योंकि यह हासिल करने या प्राप्त करने वाली चिज नहीं है, और यह एैसी भी चिज नहि है जो स्वयं अस्तित्व में आना चाहती है। यह अवस्था हमेशा मौजुद रहति है, - यह जिवन कि अवस्था है। यह स्थिति सिर्फ जीवन की कार्यात्मक गतिविधि है। 'जीवन' शब्दसे मुझे कुछ सार का मतलब नहीं है; यह इंद्रियों का जीवन है, किसी सोच के हस्तक्षेप के बिना स्वाभाविक रूप से कार्य करना। विचार पराया होता है फिरभी खुद इंद्रियों के ऊपर हावी हो जाता है। वह खुदके लाभ के लिये, खुद का अस्तीत्व बचाने के उद्देश्य से इंद्रियों की गतिविधि को निर्देशित करता है, उनसे कुछ प्राप्त करने के लिए और स्वयं को निरंतरता देने के लिए वह उनका शोषण करता है।

प्राकृतिक अवस्था का अध्यात्मिक आनंद या धार्मिक बेहोषी के अनुभव के साथ कोई संबंध नहीं है, सभी अनुभव मन के अनुभवों के क्षेत्र में रहते हैं ।

जो लोग सदियों से अध्यात्मिक खोज करते आये है ऊन्होंने शायद एैसे अध्यात्मिक ऊन्माद का अनुभव किया होगा, तो आपभी कर सकते हैं। यह अवस्था विचार से प्राप्त होती है और जैसे ही वे अनुभव आते हैं, वैसे ही वे चले जाते हैं।

सभी धार्मिक और अध्यात्मिक चेतना के अनुभव समयमे बध्द है। अगर कोई कालातीत अवस्था है तो कोई ऊसकि कल्पना भी नहीं कर सकता है। कालातीत अवस्था का अनुभवहि नहि किया जा सकता है। ऊसे कभी भी समझा नहीं जा सकता है। ऊस अवस्था को किसी भी व्यक्ति द्वारा अभिव्यक्त नहि किया जा सकता है। एैसे झुठे व्यक्तिद्वारा घिसापिटा हुआ मार्ग आपको कहि नहि ले जा सकता है। वहॉ कोई स्वर्ग नहि है, कोई मुक्तावस्था नहि है, आप सभी मृगतृष्णाके साथ फंस गए हैं। - कृष्णमुर्ती